सोमवार, 14 अगस्त 2017
सोमवार, 17 जुलाई 2017
कम्प्यूटर पर भारतीय भाषाओं का प्रयोग(यूनिकोड)
एक ज़माना था जब कम्प्यूटर तक मात्र गिने चुने लोगों की ही पहुंच होती थी | कम लोगों की पहुँच होने के कारण इसे अन्य लोगों में हौवा के रूप में भी देखा जाता था | बदलते समय के साथ कम्प्यूटर में ढेरों परिवर्तन आये साथ ही लोगों की कम्प्यूटर में पहुँच भी बढ़ी | पहले अंग्रेजी में ही काम करने की सुविधा थी पर अब धीरे-धीरे भारतीय भाषाओँ में भी कम्प्यूटर पर काम करने की सुविधा शुरू हो गयी | पर आज भी एक बड़ा तबका है जिनके लिए यह एक प्रकार से हौवा ही बना हुआ है जिसका लाभ उठाकर कई लोग अनापशनाप पैसे एवं श्रम खर्च करते हैं, कुछ विशेष ज्ञान अर्जित न हो पाने के कारण बीच में ही अपना प्रयास बंद कर देते हैं | आज हम कुछ ऐसे ही भ्रांतियों पर चर्चा करेंगे जिसमें मुख्य बिंदु कम्प्यूटर पर हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओँ में काम करने के बारे में चर्चा की जाएगी |
यूनिकोड(Unicode)-इस क्रम में सबसे पहला हौवा है| अधिकांश लोग जिन्हे कम्प्यूटर पर हिंदी में काम करना पड़ता है उनके मुख से यह सुनने में आता है कि मेरे कम्प्यूटर में यूनिकोड नहीं है, कैसे हिंदी में काम किया जाएगा | यूनिकोड की शाब्दिक विवेचन यदि हम करें तो यह पाते हैं कि यह और कुछ नहीं बल्कि यूनिवर्सल कोड है जिसे यूनिकोड का नाम दिया गया है | कम्प्यूटर की कार्यप्रणाली को यदि हम देखें तो पाते है कि कम्प्यूटर बाइनरी सिस्टम में काम करता है | बाइनरी सिस्टम का अर्थ है कम्प्यूटर के जितने भी कमांड हैं वे सब 0(जीरो) और 1(वन) पर आधारित होते हैं | कम्प्यूटर इस जीरो और वन के अतिरिक्त कुछ भी नहीं समझता |
अब प्रश्न यह आता है कि यदि हमारा कम्प्यूटर जीरो और वन के अतिरिक्त कुछ भी नहीं समझता तो इतनी सारी चीजें कैसे करता है? कम्प्यूटर पर विभिन्न कार्य या आकृति के लिए इन्हीं जीरो और वन को विभिन्न कोड के रूप में चिन्हित किया जाता है | इन कोड़ों के सहारे कम्प्यूटर स्क्रीन पर हम मनचाही विभिन्न चीजें बना सकते हैं या लिख सकते हैं | कम्प्यूटर के की बोर्ड में जितने भी की हैं उनके लिए एक निश्चित कोड निर्धारित है | इन्ही से अक्षर या आकृति बनती है | प्रारम्भ में जब कम्प्यूटर का प्रादुर्भाव हुआ, उस समय कम्प्यूटर के लिए विभिन्न भाषा(Language) बना | एक कम्प्यूटर में प्रयुक्त होने वाली भाषा(सॉफ्टवेयर) यदि दूसरे कम्प्यूटर में नहीं है तो इनके बीच साझा की गयी सामग्री जंक या गार्बेज रूप में प्रदर्शित होगी | यदि आपको यह सामग्री देखनी है तो आपको उस कम्प्यूटर के सॉफ्टवेयर को अपने कम्प्यूटर में डालना होगा तभी आप सामग्री को देख या पढ़ पाएंगे | इस समस्या से निजात पाने के लिए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने एक बैठक किया तथा यह प्रस्ताव पारित किया कि अब से जो भी सॉफ्टवेयर बने उसे ऐसा बनाया जाए कि उससे प्रोसेस की गयी सामग्री को पूरे विश्व के कम्प्यूटरों में देखने या पढ़ने में असुविधा न हो | इस बैठक के फलस्वरूप यूनिवर्सल कोडेड कैरेक्टर सेट(UCS) स्टैण्डर्ड का गठन हुआ | आज की तारीख में इसमें 136,755 कैरेक्टर हैं तथा 139 मॉडर्न एवं ऐतिहासिक भाषाएं शामिल हैं | सन 1987 में इस प्रक्रिया की शुरुवात हुई |
चूँकि भारत की राजभाषा हिंदी होने के कारण कुछ सरकारी दबाव तथा जनता की माँग पर कम्प्यूटर पर हिंदी प्रयोग के लिए विभिन्न संस्थाओं ने प्रयास प्रारम्भ किया | इस प्रयास के फलस्वरूप कई प्रकार के सॉफ्टवेयरों का विकास हुआ | जैसे कि लीप ऑफिस, योगेश इत्यादि | इन सॉफ्टवेयरों के निर्माण से हिंदी में काम करने की सुविधा कुछ-कुछ प्रारम्भ हो गयी | पर बात जस की तस रही | जिन कम्प्यूटरों में ये सॉटवेयर इंस्टाल होंगे उनमें ही इन्हे देखा और खोला जा सकता है | अन्य कम्प्यूटरों में यह गार्बेज बन जाते हैं | इन सॉटवेयरों को हम फॉण्ट भी कह सकते हैं | ऐसे फॉण्ट जो सिमित क्षेत्र या मात्र उसी कम्प्यूटर में काम करेंगे जिनमें ये इंस्टाल हों | इन्हे ट्रू टाइप फॉण्ट कहा जाता है | ऐसे फॉण्ट में कृति देव, सुशा, योगेश, चाणक्य इत्यादि आते हैं | इन फॉण्ट से काम तो चल जाता है पर एक ऐसे प्रणाली की आवश्यकता थी जो यूनिकोड के नियमों पर आधारित हो | अर्थात पूरे विश्व में बेरोकटोक खुल सके | इस प्रकार के फॉण्ट को ओपन टाइप फॉण्ट कहा गया | इन समस्यों के निजात के लिए भारत सरकार और कुछ संस्थाओं ने मिलकर भारतीय भाषाओँ के यूनिकोड स्वरुप का विकास किया | भारत एक विशाल देश है जिसमें विभिन्न प्रकार की भाषाएं प्रयोग की जाती हैं | सबसे कठिन कार्य था इन समस्त भाषाओँ के लिए किसी एक की बोर्ड का विकास करना जिससे एक ही की से समस्त भारतीय भाषाओँ के अक्षर टाइप किया जा सके | इस प्रयास में इन्स्क्रिप्ट की बोर्ड का विकास हुआ | एक ही की बोर्ड से भारत की 22 भाषाओँ में टंकण का कार्य किया जा सकता है | इसे भारत सरकार द्वारा पेटेंट करवाकर सबके लिए मुफ्त में प्रयोग के लिए दे दिया है | अब जब भी आप कम्प्यूटर खरीदते हैं उनमें यह की बोर्ड इनबिल्ट आता है | बस इसे सक्रिय करने की आवश्यकता होती है | आप भारत की जिस भाषा में काम करना चाहें अपने कम्प्यूटर से कर सकते हैं, अलग से कोई सॉफ्टवेयर डालने की आवश्यकता नहीं होगी |
अब हिंदी टंकण की विधि और प्रक्रिया के बारे में निम्नलिखित कुछ पंक्तियों में चर्चा की जा रही है |
टंकण के लिए दो प्रकार के तरीके प्रचलित हैं | प्रथम- फोनेटिक तथा द्वितीय- इन्स्क्रिप्ट या रेमिंग्टन/गोदरेज जैसा की बोर्ड |
इन्स्क्रिप्ट या रेमिंग्टन/गोदरेज जैसा की बोर्ड – पूर्व में जब कम्प्यूटर का प्रचार नहीं था उन दिनों हिंदी टंकण के लिए टाइपराइटर का प्रयोग होता था | इन टाइपराइटरों पर विभिन्न क्रम में हिंदी के 'की(Key)' होते थे | इनके प्रयोग के लिए प्रशिक्षण आवश्यक है | आगे चलकर कम्प्यूटर के अंग्रेजी की बोर्ड के साथ इस टाइपराइटर के की बोर्ड को मिला दिया गया तथा कम्प्यूटर में हिंदी टंकण की सुविधा आरम्भ हो गयी | चूँकि यह प्रणाली कुछ कठिन सी है तथा बिना पूर्व प्रशिक्षण के इसपर कार्य कर पाना भी कठिन है अतः ज्यादातर लोगों में इसका प्रचलन कम ही हुआ |
इस समस्या से निजात पाने के लिए गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने फोनेटिक टंकण की सुविधा का प्रसार करना प्रारम्भ किया | इसके लिए आपको अपने कम्प्यूटर में एक सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर इंसटाल करना होगा (google ime या microsoft Indic Input tool)| इन सॉफ्टवेयरों की मदद से आप रोमन हिंदी का प्रयोग कर हिंदी टंकण की सुविधा ले सकते हैं |जिस प्रकार से एसएमएस की भाषा में रोमन हिंदी लिखने के हम अभ्यस्त हैं, यह प्रणाली काफी कारगर साबित हुई तथा आज की तारीख में कम्प्यूटर से लेकर मोबाईल तक हर मशीन में हिंदी टंकण के लिए लोग फोनेटिक की बोर्ड का प्रयोग करने लगे हैं | इसमें यदि आपको राम लिखना हो तो आप Ram लिखकर स्पेस बार दबा दें | आपकी शब्द हिंदी या मनचाही भारतीय भाषा में परिवर्तित हो जाएगी | इस प्रक्रिया को ट्रांसलिटेरेशन भी कहा जाता है | अर्थात जो भी अंग्रेजी में लिखें वह अन्य भाषा में परिवर्तित हो जाएगा |
अब तो इस तकनीकी में और भी विकास हुआ है तथा बोलकर लिखने की सुविधा आपके कम्प्यूटर एवं मोबाइल में आ गयी है | आप भाषा का चयन कर लीजिये तथा बोलते जाइये, आपका कम्प्यूटर या मोबाईल आपकी मनचाही भाषा में टंकण करता चला जाएगा | बाद में आवश्यकतानुसार आप इसमें शुद्धिकरण भी कर सकते हैं | गूगल डॉक्स में यह सुविधा उपलब्ध है जो ऑनलाइन है |इसके अतिरिक्त आप गूगल ट्रल्सलेट एप में भी बोलकर टाइप कर सकते हैं, आवश्यकतानुसार आप लिखे गए वाक्यांश को कॉपी कर मनचाही जगह पर पेस्ट कर अपना काम चला सकते हैं | जहांतक मोबाइल का प्रश्न है, एनरोइड मोबाइल में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों प्रणालियों में यह सुविधा उपलब्ध है | मोबाईल में इस सुविधा को सक्रिय करने के लिए आपको 15 एमबी के एक सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करना पडेगा | मोबाईल में इस सुविधा को सक्रिय करने के लिए आप सेटिंग में जाएँ फिर Language & Input में जाएँ | वहां google Voice Typing ऑप्शन आएगा उसे क्लिक करें | अगला ऑप्शन offline Speech Recognition ऑप्शन में manage Downloaded Languages. ऑप्शन पर जाएँ तथा वहां अपनी मनचाही भाषा डाउनलोड कर लें(हो सकता है कुछ मोबाईल में इस प्रक्रिया में कोई फेर बदल हो, पर अमूमन हर सेट में यही प्रक्रिया होती है) | बस आप ऑफलाइन भी अपने मोबाईल में टाइप कर सकते हैं |
इस प्रक्रिया से आप अपनों से अपनी भाषा में जुड़ें एवं संपर्क करें, भारतीय भाषाओं को विलुप्त होने से तभी रोका जा सकता है जब इसके वाहक इसका अधिक से अधिक प्रयोग करें | आइये कम्प्यूटर एवं मोबाइल में हम हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओँ को अधिक से अधिक अपनाएं एवं इनका प्रचार-प्रसार करें |
यूनिकोड(Unicode)-इस क्रम में सबसे पहला हौवा है| अधिकांश लोग जिन्हे कम्प्यूटर पर हिंदी में काम करना पड़ता है उनके मुख से यह सुनने में आता है कि मेरे कम्प्यूटर में यूनिकोड नहीं है, कैसे हिंदी में काम किया जाएगा | यूनिकोड की शाब्दिक विवेचन यदि हम करें तो यह पाते हैं कि यह और कुछ नहीं बल्कि यूनिवर्सल कोड है जिसे यूनिकोड का नाम दिया गया है | कम्प्यूटर की कार्यप्रणाली को यदि हम देखें तो पाते है कि कम्प्यूटर बाइनरी सिस्टम में काम करता है | बाइनरी सिस्टम का अर्थ है कम्प्यूटर के जितने भी कमांड हैं वे सब 0(जीरो) और 1(वन) पर आधारित होते हैं | कम्प्यूटर इस जीरो और वन के अतिरिक्त कुछ भी नहीं समझता |
अब प्रश्न यह आता है कि यदि हमारा कम्प्यूटर जीरो और वन के अतिरिक्त कुछ भी नहीं समझता तो इतनी सारी चीजें कैसे करता है? कम्प्यूटर पर विभिन्न कार्य या आकृति के लिए इन्हीं जीरो और वन को विभिन्न कोड के रूप में चिन्हित किया जाता है | इन कोड़ों के सहारे कम्प्यूटर स्क्रीन पर हम मनचाही विभिन्न चीजें बना सकते हैं या लिख सकते हैं | कम्प्यूटर के की बोर्ड में जितने भी की हैं उनके लिए एक निश्चित कोड निर्धारित है | इन्ही से अक्षर या आकृति बनती है | प्रारम्भ में जब कम्प्यूटर का प्रादुर्भाव हुआ, उस समय कम्प्यूटर के लिए विभिन्न भाषा(Language) बना | एक कम्प्यूटर में प्रयुक्त होने वाली भाषा(सॉफ्टवेयर) यदि दूसरे कम्प्यूटर में नहीं है तो इनके बीच साझा की गयी सामग्री जंक या गार्बेज रूप में प्रदर्शित होगी | यदि आपको यह सामग्री देखनी है तो आपको उस कम्प्यूटर के सॉफ्टवेयर को अपने कम्प्यूटर में डालना होगा तभी आप सामग्री को देख या पढ़ पाएंगे | इस समस्या से निजात पाने के लिए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने एक बैठक किया तथा यह प्रस्ताव पारित किया कि अब से जो भी सॉफ्टवेयर बने उसे ऐसा बनाया जाए कि उससे प्रोसेस की गयी सामग्री को पूरे विश्व के कम्प्यूटरों में देखने या पढ़ने में असुविधा न हो | इस बैठक के फलस्वरूप यूनिवर्सल कोडेड कैरेक्टर सेट(UCS) स्टैण्डर्ड का गठन हुआ | आज की तारीख में इसमें 136,755 कैरेक्टर हैं तथा 139 मॉडर्न एवं ऐतिहासिक भाषाएं शामिल हैं | सन 1987 में इस प्रक्रिया की शुरुवात हुई |
चूँकि भारत की राजभाषा हिंदी होने के कारण कुछ सरकारी दबाव तथा जनता की माँग पर कम्प्यूटर पर हिंदी प्रयोग के लिए विभिन्न संस्थाओं ने प्रयास प्रारम्भ किया | इस प्रयास के फलस्वरूप कई प्रकार के सॉफ्टवेयरों का विकास हुआ | जैसे कि लीप ऑफिस, योगेश इत्यादि | इन सॉफ्टवेयरों के निर्माण से हिंदी में काम करने की सुविधा कुछ-कुछ प्रारम्भ हो गयी | पर बात जस की तस रही | जिन कम्प्यूटरों में ये सॉटवेयर इंस्टाल होंगे उनमें ही इन्हे देखा और खोला जा सकता है | अन्य कम्प्यूटरों में यह गार्बेज बन जाते हैं | इन सॉटवेयरों को हम फॉण्ट भी कह सकते हैं | ऐसे फॉण्ट जो सिमित क्षेत्र या मात्र उसी कम्प्यूटर में काम करेंगे जिनमें ये इंस्टाल हों | इन्हे ट्रू टाइप फॉण्ट कहा जाता है | ऐसे फॉण्ट में कृति देव, सुशा, योगेश, चाणक्य इत्यादि आते हैं | इन फॉण्ट से काम तो चल जाता है पर एक ऐसे प्रणाली की आवश्यकता थी जो यूनिकोड के नियमों पर आधारित हो | अर्थात पूरे विश्व में बेरोकटोक खुल सके | इस प्रकार के फॉण्ट को ओपन टाइप फॉण्ट कहा गया | इन समस्यों के निजात के लिए भारत सरकार और कुछ संस्थाओं ने मिलकर भारतीय भाषाओँ के यूनिकोड स्वरुप का विकास किया | भारत एक विशाल देश है जिसमें विभिन्न प्रकार की भाषाएं प्रयोग की जाती हैं | सबसे कठिन कार्य था इन समस्त भाषाओँ के लिए किसी एक की बोर्ड का विकास करना जिससे एक ही की से समस्त भारतीय भाषाओँ के अक्षर टाइप किया जा सके | इस प्रयास में इन्स्क्रिप्ट की बोर्ड का विकास हुआ | एक ही की बोर्ड से भारत की 22 भाषाओँ में टंकण का कार्य किया जा सकता है | इसे भारत सरकार द्वारा पेटेंट करवाकर सबके लिए मुफ्त में प्रयोग के लिए दे दिया है | अब जब भी आप कम्प्यूटर खरीदते हैं उनमें यह की बोर्ड इनबिल्ट आता है | बस इसे सक्रिय करने की आवश्यकता होती है | आप भारत की जिस भाषा में काम करना चाहें अपने कम्प्यूटर से कर सकते हैं, अलग से कोई सॉफ्टवेयर डालने की आवश्यकता नहीं होगी |
अब हिंदी टंकण की विधि और प्रक्रिया के बारे में निम्नलिखित कुछ पंक्तियों में चर्चा की जा रही है |
टंकण के लिए दो प्रकार के तरीके प्रचलित हैं | प्रथम- फोनेटिक तथा द्वितीय- इन्स्क्रिप्ट या रेमिंग्टन/गोदरेज जैसा की बोर्ड |
इन्स्क्रिप्ट या रेमिंग्टन/गोदरेज जैसा की बोर्ड – पूर्व में जब कम्प्यूटर का प्रचार नहीं था उन दिनों हिंदी टंकण के लिए टाइपराइटर का प्रयोग होता था | इन टाइपराइटरों पर विभिन्न क्रम में हिंदी के 'की(Key)' होते थे | इनके प्रयोग के लिए प्रशिक्षण आवश्यक है | आगे चलकर कम्प्यूटर के अंग्रेजी की बोर्ड के साथ इस टाइपराइटर के की बोर्ड को मिला दिया गया तथा कम्प्यूटर में हिंदी टंकण की सुविधा आरम्भ हो गयी | चूँकि यह प्रणाली कुछ कठिन सी है तथा बिना पूर्व प्रशिक्षण के इसपर कार्य कर पाना भी कठिन है अतः ज्यादातर लोगों में इसका प्रचलन कम ही हुआ |
इस समस्या से निजात पाने के लिए गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने फोनेटिक टंकण की सुविधा का प्रसार करना प्रारम्भ किया | इसके लिए आपको अपने कम्प्यूटर में एक सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर इंसटाल करना होगा (google ime या microsoft Indic Input tool)| इन सॉफ्टवेयरों की मदद से आप रोमन हिंदी का प्रयोग कर हिंदी टंकण की सुविधा ले सकते हैं |जिस प्रकार से एसएमएस की भाषा में रोमन हिंदी लिखने के हम अभ्यस्त हैं, यह प्रणाली काफी कारगर साबित हुई तथा आज की तारीख में कम्प्यूटर से लेकर मोबाईल तक हर मशीन में हिंदी टंकण के लिए लोग फोनेटिक की बोर्ड का प्रयोग करने लगे हैं | इसमें यदि आपको राम लिखना हो तो आप Ram लिखकर स्पेस बार दबा दें | आपकी शब्द हिंदी या मनचाही भारतीय भाषा में परिवर्तित हो जाएगी | इस प्रक्रिया को ट्रांसलिटेरेशन भी कहा जाता है | अर्थात जो भी अंग्रेजी में लिखें वह अन्य भाषा में परिवर्तित हो जाएगा |
अब तो इस तकनीकी में और भी विकास हुआ है तथा बोलकर लिखने की सुविधा आपके कम्प्यूटर एवं मोबाइल में आ गयी है | आप भाषा का चयन कर लीजिये तथा बोलते जाइये, आपका कम्प्यूटर या मोबाईल आपकी मनचाही भाषा में टंकण करता चला जाएगा | बाद में आवश्यकतानुसार आप इसमें शुद्धिकरण भी कर सकते हैं | गूगल डॉक्स में यह सुविधा उपलब्ध है जो ऑनलाइन है |इसके अतिरिक्त आप गूगल ट्रल्सलेट एप में भी बोलकर टाइप कर सकते हैं, आवश्यकतानुसार आप लिखे गए वाक्यांश को कॉपी कर मनचाही जगह पर पेस्ट कर अपना काम चला सकते हैं | जहांतक मोबाइल का प्रश्न है, एनरोइड मोबाइल में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों प्रणालियों में यह सुविधा उपलब्ध है | मोबाईल में इस सुविधा को सक्रिय करने के लिए आपको 15 एमबी के एक सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करना पडेगा | मोबाईल में इस सुविधा को सक्रिय करने के लिए आप सेटिंग में जाएँ फिर Language & Input में जाएँ | वहां google Voice Typing ऑप्शन आएगा उसे क्लिक करें | अगला ऑप्शन offline Speech Recognition ऑप्शन में manage Downloaded Languages. ऑप्शन पर जाएँ तथा वहां अपनी मनचाही भाषा डाउनलोड कर लें(हो सकता है कुछ मोबाईल में इस प्रक्रिया में कोई फेर बदल हो, पर अमूमन हर सेट में यही प्रक्रिया होती है) | बस आप ऑफलाइन भी अपने मोबाईल में टाइप कर सकते हैं |
इस प्रक्रिया से आप अपनों से अपनी भाषा में जुड़ें एवं संपर्क करें, भारतीय भाषाओं को विलुप्त होने से तभी रोका जा सकता है जब इसके वाहक इसका अधिक से अधिक प्रयोग करें | आइये कम्प्यूटर एवं मोबाइल में हम हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओँ को अधिक से अधिक अपनाएं एवं इनका प्रचार-प्रसार करें |
शुक्रवार, 16 जून 2017
चने के भाव बिकती डिग्रियाँ : खरीददार चाहिए
कुछ दिनों से अखबारों में कलकत्ता के कई इलाकों में नकली डॉक्टरों के पकड़े
जाने की ख़बर आ रही है। वाकई में यह चिंताजनक खबर है कि मैट्रिक पास लोग
भी एम.बी.बी.एस की नकली डिग्री के सहारे कई वर्षों से निर्विरोध चिकित्सा
के व्यवसाय में लगे हुए हैं। इनमें से कई तो नामी अस्पतालों में नौकरी करते
हुए भी पाये गए । निजी प्रैक्टिस भी खूब चल रही थी । जांच एजेंसियों के
चक्कर में आने के बाद बड़े बड़े खुलासे होने लगे । अब इस प्रकार की घटनाओं से
ज्यादा हैरान होने की बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में नकली शिक्षण
संस्थानों की भी खूब बढ़ आई हुई है। अलग-अलग शहरों में बड़े बड़े प्रचार
माध्यमों के द्वारा किसी भी डिग्री की परीक्षा पास करवाने की गारंटी सह
प्रचार आपको दिख जाएगा। एक पड़ताल के दौरान यह पाया गया कि इन संस्थानों को
आप एक निश्चित शुल्क दीजिये,कुछ ही दिनों में वे आपको मनचाही डिग्री मिल
जाएगी,चाहे वह चिकित्सा के क्षेत्र की हो या अन्य कोई । कुछ वर्षों पहले
हमारी भेंट ऐसे ही एक एजेंट से हुई। विभिन्न प्रकार की डिग्री के लिए
भिन्न-भिन्न दर,आपको न तो परीक्षा देने जाना है न ही तो परेशान होने की
जरूरत,डिग्री उनके घर से जाकर ले आये। कई राज्यों के विश्वविद्यालय से उनके
तार जुड़े होने की बात सामने आई । आजमाने के लिए एक मित्र ने उनके साथ सौदा
भी किया । बात 35 हजार रुपये में एम ए की डिग्री के लिए तय हुई । सब कुछ
ठीक ठाक चला । डिग्री बड़े ही सुंदर कागज में छप कर आई। विश्वविद्यालय से
इसे सत्यापन करने का भी उपाय बताया गया। हमने विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर
सत्यापन करना चाहा पर कोई जवाब नहीं आया। बाद में पता लगा कि वो सज्जन
डिग्रियां घर मे ही छाप रहे हैं।शहर-दर-शहर गली कूचों में इस प्रकार के
एजेंट मिल जाएंगे । ऐसे लोगों के झांसे में पड़कर कई युवक गुमराह होकर पैसे
और समय खराब कर रहे हैं। ऐसे मामलों में ठगे गए लोग लोकलाज एवं शर्म से
किसी को बताना जरूरी नहीं समझते। यह तो एक छोटा सा उदाहरण है। ऐसी घटनाओं
से पूरा देश भरा पड़ा है, हर प्रकार की डिग्री दिलाने का वादा करते हुए मिल
ही जाएँगे । पर ठगे जाने के बावजूद लोग कहीं शिकायत नहीं करते हैं। यह देश
में एक ज्वलंत मुद्दा है । विद्यार्थी और सरकार दोनों की यह ज़िम्मेदारी
बनती है कि ऐसे लोगों को नकेल कसें और ठगी को रोकें ।
रविवार, 9 अप्रैल 2017
हिंदी में विज्ञान-कुछ विशेष लिंक साभार राहुल खटे
केंद्र/राज्य सरकार के कार्यालयों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा प्रकाशित पुस्तिका जिसकी कीमत सिर्फ ₹20/- हैं और इसे आप 50 प्रतिशत की छूट अर्थात सिर्फ प्रति कॉपी ₹10/-(डाक-व्यय अतिरिक्त) पर पर प्राप्त कर सकते हैं। आयोग ने इसका एक एंड्रॉइड ऍप भी लॉन्च किया है। जिसे आप इस लिंक से प्राप्त कर सकते हैं। https://play.google.com/store/apps/details?id=matrixdev.com.csttglossary
https://youtu.be/EAIIZrHwBik
[22/03, 8:45 PM] Rahul Khate. Hindi: http://hariraama.blogspot.in/2007/09/ramsetu-environmental-issues.html?m=0
[23/03, 9:18 AM] +91 98199 83708: अरविंद कुमारः हिंदी का एक मौन महर्षि जिसके आगे हर हिंदी प्रेमी नतमस्तक है
http://hindimedia.in/arvind-kumar-a-silent-maharshi-of-hindi-in-front-of-which-every-hindi-boyfriend-is-a-knit/
[25/03, 9:11 AM] Rahul Khate. Hindi: http://vishwavahini.blogspot.in/2017/02/blog-post.html?m=0
[26/03, 11:43 AM] Rahul Khate. Hindi: विश्व पर्यावरण दिवस: http://airworldservice.org/hindi/archives/category/news-hindi/world-news-hindi
[26/03, 12:21 PM] Rahul Khate. Hindi: https://youtu.be/2to4pXFNclU
[26/03, 7:32 PM] Rahul Khate. Hindi: AMAZING TECHNOLOGY
नीचे दी गई लिंक को ओपन करें, इसके बाद पृथ्वी का गोला यानी ग्लोब दिखाई देगा। उस ग्लोब पर अनेक हरे रंग के छोटे बडे बिंदु दिखाई देंगे। उन बिन्दुओं पर जिस किसी भी देश का रेडियो स्टेशन लाईव सुनाई पडेगा। आजमा कर देखें।
http://radio.garden/live
[28/03, 11:29 AM] +91 98693 74603: https://youtu.be/vYK_DW-TN4E
[28/03, 5:24 PM] +91 98199 83708: https://youtu.be/vi-OS_d6E24
[29/03, 2:32 PM] Rahul Khate. Hindi: https://youtu.be/gRY_-a0O5LU
[29/03, 2:51 PM] Rahul Khate. Hindi: https://youtu.be/rC-XseI-HWI
[29/03, 2:54 PM] Rahul Khate. Hindi: https://youtu.be/LFXPY-cghKA
https://youtu.be/EAIIZrHwBik
[22/03, 8:45 PM] Rahul Khate. Hindi: http://hariraama.blogspot.in/2007/09/ramsetu-environmental-issues.html?m=0
[23/03, 9:18 AM] +91 98199 83708: अरविंद कुमारः हिंदी का एक मौन महर्षि जिसके आगे हर हिंदी प्रेमी नतमस्तक है
http://hindimedia.in/arvind-kumar-a-silent-maharshi-of-hindi-in-front-of-which-every-hindi-boyfriend-is-a-knit/
[25/03, 9:11 AM] Rahul Khate. Hindi: http://vishwavahini.blogspot.in/2017/02/blog-post.html?m=0
[26/03, 11:43 AM] Rahul Khate. Hindi: विश्व पर्यावरण दिवस: http://airworldservice.org/hindi/archives/category/news-hindi/world-news-hindi
[26/03, 12:21 PM] Rahul Khate. Hindi: https://youtu.be/2to4pXFNclU
[26/03, 7:32 PM] Rahul Khate. Hindi: AMAZING TECHNOLOGY
नीचे दी गई लिंक को ओपन करें, इसके बाद पृथ्वी का गोला यानी ग्लोब दिखाई देगा। उस ग्लोब पर अनेक हरे रंग के छोटे बडे बिंदु दिखाई देंगे। उन बिन्दुओं पर जिस किसी भी देश का रेडियो स्टेशन लाईव सुनाई पडेगा। आजमा कर देखें।
http://radio.garden/live
[28/03, 11:29 AM] +91 98693 74603: https://youtu.be/vYK_DW-TN4E
[28/03, 5:24 PM] +91 98199 83708: https://youtu.be/vi-OS_d6E24
[29/03, 2:32 PM] Rahul Khate. Hindi: https://youtu.be/gRY_-a0O5LU
[29/03, 2:51 PM] Rahul Khate. Hindi: https://youtu.be/rC-XseI-HWI
[29/03, 2:54 PM] Rahul Khate. Hindi: https://youtu.be/LFXPY-cghKA
अनुवाद में सही शब्द का चयन महत्वपूर्ण क्यों??
अनुवाद में उचित शब्द चुनना बहुत महत्वपूर्ण है:अनुवादक दूसरे भाषा में किसी विशेष भाषा के विचारों और सामग्री का अनुवाद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक भाषा से दूसरे में शब्दों का रूपांतरण मजेदार हो सकता है, पर साथ उपयुक्त शब्द चुनना भी बहुत ही महत्वपूर्ण है । एक शब्द दूसरे भाषा में कई अर्थों का प्रतिनिधित्व कर सकता है इसलिए यह तय करना महत्वपूर्ण है कि किस शब्द को चुनना है जो टेक्स्ट और पर्यावरण के अनुकूल है। एक छोटी सी गलती केवल विचारों के सार को नहीं मार देती है बल्कि विवाद भी पैदा कर सकती है, और यदि ऐसा कुछ होता है, तो अनुवादक के कैरियर के यहां पटाक्षेप होने में समय नहीं लगता। हाल ही की एक घटना गौर करने लायक है जहां CBSE के कक्षा 12 के बायोलॉजी के अंग्रेजी प्रश्नपत्र ने पूरे देश मे सोशल मीडिया के माध्यम से वर्तमान सरकार को कठघरे में खड़ा करने में देर नहीं किया।(संदर्भ टाइम्स ऑफ इंडिया,कलकत्ता एडिशन,दिनांक 09 अप्रैल 2017 पृष्ठ संख्या 7)।
राजनीति में न पड़कर यदि इस घटना की विवेचना करें तो पता चलेगा कि अनुवादक की एक गलती ने क्या से क्या कर डाला। इस एक घटना ने उस अनुवादक के कैरियर में कमोबेश कुछ तो बट्टा लगा ही दिया होगा।
यहाँ में भावी एवं वर्तमान अनुवादकों को यह सलाह देना चाहूंगा कि ऐसी गलती न हो उसके लिए आवश्यक है कि आप देश,काल,माहौल और परिवेश का ध्यान रखते हुए सटीक शब्द का चयन करें।
राजनीति में न पड़कर यदि इस घटना की विवेचना करें तो पता चलेगा कि अनुवादक की एक गलती ने क्या से क्या कर डाला। इस एक घटना ने उस अनुवादक के कैरियर में कमोबेश कुछ तो बट्टा लगा ही दिया होगा।
यहाँ में भावी एवं वर्तमान अनुवादकों को यह सलाह देना चाहूंगा कि ऐसी गलती न हो उसके लिए आवश्यक है कि आप देश,काल,माहौल और परिवेश का ध्यान रखते हुए सटीक शब्द का चयन करें।
रविवार, 19 फ़रवरी 2017
दहशत
दहशत
आज पूरा शहर दहशत में है | हर तरफ आशंकाओं का माहौल | सभी डरे हुए अपने घरों में दुबके हुए हैं | कोई किसी से बात करने के लिए तैयार नहीं | अफवाहों का माहौल गरम है | हर मिनट नई नई खबर आ
रही है | कभी यह खबर आती कि बाहर से हजारों की संख्या
में जेहादी आक्रमण के लिए चल पड़े हैं , तो कभी खबर आती कि आज
शाम को फिर से हमला होने वाला है | जितने मुंह उतनी बातें
चल रही है |
जबसे सर जी ने स्ट्राइक करवाया है तब से
मोहल्ले की चैन गायब है | एक तरफ सीमा पर के
प्रशंसक तो दूसरी तरफ देशभक्ति में सारोबार लोग | कल तक जो आपस में भाई भाई से लगते थे, एक साथ रहते थे , आज सरहदों के बवाल के
चक्कर में अपने ही घर में बवाल मचा बैठे हैं | दोनों दलों के छुटभैये कद्दवार नेता अपनी अपनी
हांकने में लगे हुए हैं | कोई किसी से उन्नीस
नहीं रहना चाहता | खुद को बीस बनाने के चक्कर में , अपनी अपनी कौम के रहनुमा बने युद्ध स्तर पर हिंसा
अभियान को जारी रखे हुए हैं | अगर देखा जाए तो कुछ
विशेष बात थी ही नहीं |
विद्यालय में परीक्षा चल रही थी | एक छात्र नक़ल करते हुए पकड़ा गया और कक्षा से बाहर
निकाल दिया गया | परीक्षा की समाप्ति के बाद विद्यालय के गेट के
बाहर उस छात्र ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर नक़ल रोकने वाले शिक्षक पर हमला कर
दिया| शिक्षक के बचाव में कुछ लोग आगे आये , पर यह क्या!! उस छात्र को जैसे ही
चपत पड़ी, उसने इसे साम्प्रदायिक रंग दे डाला | भागते हुए उसने ऐलान किया कि दूसरी कौम के लोग हमें
मारना चाहते हैं | भागो …..|
उसके आवाज देते ही तलवारें खिंच गयीं, हथगोले और गोलियों की बौछार होने लगी | मास्टर जी किसी प्रकार से अपनी जान बचाकर भागे | आज इस घटना की बीते लगभग पंद्रह दिन हो गए पर तनाव में कोई परिवर्तन नहीं
आया | सब परेशान हैं पर किसी से कुछ कह भी नहीं सकते
|
सड़क के एक कोने पर भोंदू चाय वाला एक छोटे से
खोमचे में अपनी दूकान चलता हैं | उसके हाथों की चाय
पीने के लिए हर कौम के लोग लालायित होकर आते थे, वहीँ बैठकर घंटों देश- दुनिया के हाल पर
रायशुमारी करते थे |
आज तो तब हद हो गयी जब कुछ लोग
उसे पटक कर मारने लगे और उसका गला रेंतने का प्रयास करने लगे
| कुछ लोगों ने इस कृत्य का विरोध किया तो
उन्हें भी गालियां पड़ीं | किसी प्रकार से भोंदू
को तो बचा लिया गया पर उसकी दूकान तबतक आग से जलकर ख़ाक हो गयी | चौराहे पर बैठा उसे जलते हुए देखता रहा | | उसके परिवार के जीविका के साधन को लुटते देखता रहा |कुछ कर भी तो नहीं सकता था …........
बूढ़े काका की एकमात्र सब्जी की दूकान थी
मोहल्ले में, उसे भी लोगों ने जला दिया | काका भी भोंदू जैसा ही एक गरीब आदमी था जिसके आजीविका
के सीमित साधन थे जिसे भीड़ ने नष्ट कर दिया |
पुलिस की रेपिड एक्शन टीम आ चुकी थी | उन्होंने पास के तीन किलोमीटर के दायरे को
सील कर दिया |ना कोई अंदर आ
सकता था ना ही किसी को बाहर जाने की इजाजत थी | सारी दुकाने बंद हैं | बंद भला क्यों न हों |कौन है जिसे अपनी संपत्ति और अपनी जान प्रिय
न हो | कर्फ्यू के आज पंद्रहवां दिन है |दूध के लिए बच्चे तड़प रहे हैं | खाने पीने का समान सब कुछ ख़त्म हो चुका है | दहशत के मारे और कर्फ्यू में कोई भी दूकान
खोलने के लिए राजी नहीं है | ना मश्जिद से आजान की आवाज आ रही है ना ही मंदिर से पूजा की घंटियों का | लगता है जैसे भगवान और खुदा दोनों ही इस
झंझट से मर्माहत हो चुके इसलिए इनके बन्दे भी चुप हैं |
लघु कथा *और भूत भाग गया*
जुमानी की माँ
बहुत दुखी थी,पति कैंसर से
मर गए। एक बेटा और बेटी सर्प दंश से काल कलवित हो गए। एक बेटी बची थी,वह भी अर्ध विक्षिप्त रहती थी। गांव वालो के
अनुसार उनके घर पर ब्रह्मराक्षस का साया था। एक दिन पडोसी के दामाद से भेंट हुई,उनहोंने सुन रखा था कि दामादजी का बड़े बड़े
तांत्रिको से परिचय है।बात हुई। प्रेत निवारण के लिए उनके साथ नेपाल के तराई के एक
मशहूर तांत्रिक से बात हुई।एक लाख रुपया में बात तय हुई। दोनों घर आ गए। नियत दिन
दामादजी बड़ी सी गाड़ी में तीन चार पंडितों को लेकर पहुंचे।पण्डितों को पहले ही बता
दिया गया था कि जैसे ही इशारा हो,ढेर सारा धुवां किया जाए और अगले इशारे में लपक कर गाड़ी में बैठ जाएं।
रुपया अग्रिम ले लिया गया। पूजा प्रारम्भ हुई।हवन प्रारम्भ हुआ।जोर के धुएं में
बेटी बेहोश हो गई। दामादजी ने क़ज़ा कि प्रेत भाग गया। पंडितों को इशारा किया,सब लपक कर गाड़ी में बैठ गए और निकल पड़े।
हमने पूछा कि प्रेत सच में उतर गया क्या?
दामादजी ने
बताया कि जब भी मां बेटी मुझे देखती हैं,बेटी का पागलपन शांत हो जाता है,उसकी माँ भी अब बिलखती नहिं है। प्रेत भागने का इससे बड़ा प्रमाण और क्या
हो सकता है।
और उसने रिश्वत नहीं दी ….......
मंटू बड़ा खुश
था | प्राइमरी में
टीचर लगे उसे अभी साल भर भी नहीं हुआ था कि सरकार द्वारा प्रायोजित डी-एड पाठ्यक्रम के लिए उसका नामांकन हो गया | प्राइमरी स्तर के बालकों को पढ़ाने के लिए डी-एड की पढाई काफी महत्वपूर्ण है | समय पर समस्त शिक्षक सेंटर पहुँच गए | पाठ्यक्रम प्रारम्भ हो गया | रोज ही विभिन्न प्रकार के लेसन प्लान और
चार्ट बनाने की आवश्यकता पड़ती | धीरे धीरे समय बीतने लगा और प्रथम वर्ष की परीक्षा की तारीख की घोषणा कर
दी गयी | सभी पूरी
तयारी में लग गए | एक दिन अचानक
सेंटर के प्रिंसिपल ने सभी प्रशिक्षुओं को अपने कमरे में बुला भेजा | आने के बाद उन्होंने बताया कि बाहर से
परीक्षक आएंगे | उनके खाने
पीने एवं आने जाने के खर्चे के लिए समस्त छात्र ढाई सौ रुपया करके जमा करवा दें | समस्त छात्रों ने रुपया जमा करवा दिया | बस उनमें से एक ने नहीं जमा किया | परीक्षक आये, लेसन प्लान देखा और फिर चले गए |
एक दिन प्रिंसिपल ने पुनः सभी छात्रों को इकठ्ठा किया और कहा कि परीक्षा
में पास करने के लिए सभी छात्र ढाई हजार रूपया के दर से जमा करवा दें | कुछ छात्रों ने विरोध किया | उन्हें इस सुविधाशुल्क के आवश्यकता के बारे
में बता दिया गया | वो राजी हो गए
| कौन भला ऐसा होगा जो
फेल करना चाहेगा | वह भी तब जब
मात्र ढाई हजार रूपये की दक्षिणा देने से ही पास होना सुनिश्चित हो तो | पर उसने इस बार भी पैसा जमा नहीं किया | उसके ऊपर दबाव बनाया जाने लगा | प्रिंसिपल ने उसे बुलाकर धमकी तक दे डाला की
पैसे नहीं दिए तो फेल हो जाओगे पर वह अडिग रहा | बढ़ते बढ़ते उसके हठ की बात उसके सहपाठियों तक
पहुंची | प्रिंसिपल के
कमरे से निकल कर वह कक्षा में आया | यहाँ सहपाठियों ने भी उसे आड़े हाथों लिया और धमकाना शुरू कर दिया | वह फिर भी नहीं माना | फलतः समस्त छात्रों ने उसे धक्का मारकर
क्लास के बाहर निकाल दिया | वह बेचारा चुपचाप क्लास के बाहर आकर एक कोने में चुपचाप खड़ा हो गया | मंटू उसके पास आया | उसे समझाते हुए बोला, 'क्यों नहीं दे देते हो तुम भी, इससे कम-से-कम पास होने की गारंटी तो हो जाएगी |'
उसने कहा, 'देखो यार,यदि मुझे इस प्रकार से रिश्वत ही देना होता
तो आज मैं प्राइमरी टीचर नहीं होता बल्कि किसी और ओहदे पर होता | पर जो मैं नहीं करना चाहता वह नहीं करूँगा | क्या हुआ अगर मेरी मेहनत के बाद भी यदि मुझे
फेल कर दिया जाता है तो? एक साल और पढूंगा | कुछ दिन और सही | पर एक बात मेरी समझ में नहीं आ रही है | रिश्वत प्रिंसिपल ने माँगा, लाभ उसे मिलेगा | फिर इन छात्रों का क्या बिगड़ रहा है जो
उन्होंने मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया | उन्हें क्या लाभ मिलने वाला है? क्या ये अभी से ही प्रिंसिपल के जैसे हो गए हैं ?'
मंटू भी यही सोचता रहा कि छात्रों ने उसे धक्का देकर क्यों निकाला |
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