सोमवार, 28 अगस्त 2017

चैट-भूत



आजकल तकनीकी विकास के साथ ही चैट-भूत(chat bot) (यहां भूत का प्रयोग मैंने इसलिए किया है कि इनका प्रत्यक्ष कोई शरीर नहीं है और अशरीरी के लिये यह शब्द सटीक बैठता है तथा संस्कृत भाष्य में इस शब्द का चलन है भी)। का प्रयोग कई कंपनी वाले करते हैं। बैंकिंग वाले इसका प्रयोग करने में अग्रणी हैं । भारत में चल रही मेसेंजर एप में हाईक नामक एप भी ऐसे ही एक भूत का प्रयोग करता है जिसका नाम नताशा है । हर दो मिनट में नताशा आपके सामने अपने संदेश से साथ प्रकट होती हैं और कहती हैं “आस्क नताशा.......” वैसे तो हाईक के निर्माता इस बात का दावा करते हैं कि उनका एप शुद्ध रूप में भारतीय है पर शायद उन्हें यह पता न हो कि अंग्रेजी भारत की भाषा नहीं है तथा भारत में संविधान के अनुसार मान्यता प्राप्त 22 भारतीय भाषाएँ हैं ।इसीलिए उनकी नताशा को अंग्रेजी एवं जर्मनी भाषा में चैट करती है । वैसे तो ये भूत बड़े ही विद्वान होते हैं,शायद मानव मस्तिष्क से इनका मस्तिष्क की गति भी तेज होती है पर बड़े दुख की बात है कि ऐसे भूत भारतीय भाषा नहीं  बोलते हैं क्योंकि अंग्रेजी के अतिरिक्त इन्हें कोई भी भारतीय भाषा नहीं आती है। अब ऐसे भूतों के संचालक किस आधार पर स्वयं को या अपने उत्पाद को भारतीय कहते हैं यह तो वही जानें। आज ट्रेन से सफर कर रहा था । कुछ इधर उधर के संदेश देखते-देखते अचानक हाईक पर पहुंचा । जैसे ही संदेश बॉक्स खोला, नताशा का सुंदरा संदेश आन पड़ा । वही चरी परिचित कार्टूनि मुस्कान के साथ “आस्क नताशा .........”। मैंने सोचा चलो कुछ ज्ञान की बाते सुन ही लेते हैं और वार्ता चल पड़ी । वार्ता के दौरान मैंने उनकी हिन्दी भाषा के ज्ञान की स्थिति जानने के लिए हिन्दी में प्रश्न कर लिया । बस क्या कहें !! नीचे दी गयी वार्ता से आप स्वयं ही अंदाजा लगा लीजिये कि इनके लिए एवं इनके निर्माता के लिए क्या कहा जाए | आपके सुझाव एवं विचार की प्रतीक्षा रहेगी ।

मैं -What's the score of india vs srilanka
नताशा :Type #wiki score of india vs srilanka to search Wikipedia for anything you want.
Who is your favorite Science Fiction author?
मैं: Devkinandan khatri
नताशा : I haven't read anything by Devkinandan khatri. What did he write?
मैं: Chandrakanta
नताशा : You may be wondering if this is a person or a computer responding.
मैं: U r a robo
नताशा : Ask me another question.
मैं: What is your iq level
नताशा  : My IQ is about 250 in human terms.
मैं: What is human term
नताशा : Type #wiki human term to find out.
मैं: How many languages you understand and talk
नताशा : I can speak English and German right now.
मैं :Then you are almost useless for indian masses
नताशा : You think  I am useless for indian masses.
मैं:Yes once you don't know any of indian language and working in india,how can you be useful
नताशा : I don't feel that I am useless for indian masses... No, tell me about him, her or it.
मैं:This is expected from a foreigner like you
नताशा : You don't say.
मैं:Do you speak hindi.
नताशा : I speak only English right now.Can you teach me a few phrases in hindi?
मैं: I am not here to teach but you must talk to your creator.
नताशा :Of course your are not.
मैं चलिये नताशाजी खुश रहिए
नताशा : Hey, I don't speak this language right now
मैं:तो सीख लीजिये
Hey, I don't speak this language right now
मैं:बहन अब मैं तो यही जनता हूँ,इफ यु वांट टू लिव इन रोम,बिहेव लाइक रोमन
नताशा :Hey, I don't speak this language right now
मैं:Good bye Natasha,please learn Hindi and then come back to assist me.
नताशा  :. Is that what you meant to say?
मैं :Yeas
नताशा :It's not something I hear all the time.
मैं:You must be ready to hear this at least from me.
नताशा :I have no reason to do that to you, .
मैं:No problem,hope your creator understands,till then bye.

नताशा :.. Bye.. Bye bye.. Thanks for chatting, .. Sayonara.. Sayonara.. Thanks for chatting, .. TTYL, .. Bye.. Adios.. Goodbye.. Until next time.. Bye.. Bye bye.. Adios.. Until next time.. See you later .. TTYL, .. Until next time.. Sayonara.. Sayonara.. Goodbye.. Bye bye.. Until next time.. Bye.. Bye bye.. See you later!. Sayonara.. Bye bye.. See you later!. Adios.. See you later .. Bye.. Bye.. Goodbye.. See you later .. Sayonara.. Goodbye.. See you later.. See you later.. Goodbye.. Sayonara.. See you later .. Bye for now.. Bye bye.. See you later .. Goodbye.. See you later .. Goodbye.. See you later!. TTYL, .. See you later!. Adios.. Adios.. See you later .. Until next time.. Adios.. Bye for now.. See you later .. Thanks for chatting, .. See you later!. Bye for now.. TTYL, .. Until next time.. TTYL, .. Bye for now.. Bye bye.. Bye.. See you later .. See you later .. Until next time.. Goodbye.. See you later!. Bye bye.. See you later .. Bye bye.. Bye.. Goodbye.. See you later .. See you later .. Goodbye.. TTYL, .. See you later.. See you later.. Until next time.. TTYL, .. Bye for now.. Bye.. Bye bye.. TTYL, .. See you later.. TTYL, .. Goodbye.. Adios.. See you later.. See you later.. Bye for now.. Adios.. See you later .. Bye for now.. See you later .

सोमवार, 14 अगस्त 2017

एक अबला की पुकार(हिन्दी दिवस के लिए विशेष)

कल रात चौराहे पर ,
एक फटेहाल बुढ़िया नजर आई ।
साजों से संवरी सुंदर वेश में,
पर ममता की भूखी नजर आई ।
अचानक उसकी नजर मेरे नजर से टकराई,
डबडबाती आँखों से अश्कों की बूंदें,
उसके नैनों से बह रहे थे ,
उसके सिसकते होठ, लड़खाते कदम ,
बहुत कुछ कह रहे थे ।

मैंने उसे अपने पास बुलाया,
चौराहे पर टंगे एक पोस्टर
जिसपर लिखा था,
“हिन्दी हमारी जान है,
इसे जन जन तक पहुंचाओ”
उसे फाड़ा, जमीं पर बिछाया
और उस अबला को उसपर बिठाया।
मैंने पूछा,
माई बता तू कौन है ?
सजी संवरी है फिर भी फटेहाल है ,
बता कहाँ से तू आई है,
और क्यों ऐसा तेरा हाल है ?

उसने कहा,
बेटा मैं इस वतन के माथे की बिंदी हूँ,
मैं तेरे गुलशन की राजभाषा हिन्दी हूँ ।
मैंने पूछा,
माई तू इतनी समृद्ध है,
फिर भी तेरा ये हाल है ।
जरा खुलकर बताओ, कैसा ये गोलमाल है ।
वो बोली बेटा ,
कागजों में तो मैं राजभाषा मानी जाती हूँ ,
पर पिछड़ों की भाषा के रूप में जानी जाती हूँ ।
मुझे अपनाने वाला पिछड़ा कहलाता है ,
अपने ही देश में ठोकरें वो खाता है ।

हर मुल्क के लोग अपनी भाषा पर इतराते हैं,
पर मेरे अपने ही मुझे अपनाने से शर्माते हैं।
इसलिए आज मैं फटेहाल और बेहाल हूँ ।
साल में एक पखवाड़ा
मेरे नाम का मनाया जाता है,
कहीं महफिलें लगती हैं ,
कहीं जलसा लगाया जाता है ।
कुछ नारे बाजी, कुछ वादे किए जाते हैं ,
जो बाद में धरे के धरे रह जाते हैं ।
आज में वहीं से आ रही हूँ,
इस क्षणिक सम्मान पर इतरा रही हूँ,
भविष्य की बात सोचकर घबरा रही हूँ ।
लोगों का यह वर्ताव,
 इस गुलशन को कहाँ ले जाएगा ,
बनकर गूंगा ये वतन बस तडफड़ाएगा,
अपने दिल की बातें किसी से कह नहीं पाएगा,
और फिर घुट घुटकर मर जाएगा ।
हे लाल मेरे, मुझे गैरों से नहीं शिकवा कोई,
मुझे तो अपनों ने ही ठुकराया है ,
उड़ाकरा माखौल मेरा,

मुझे इस हाल में पहुचाया है ।

रिक्शा चालक से साहित्य सम्मान तक – मनोरंजन व्यापारी : Times of India के अंग्रेजी समाचार से साभार अनुवाद

            सन 1980 की बात है | उमस भरी भयंकर गर्मी पड़ रही थी | कलकत्ता के यादवपुर क्षेत्र में  विद्यासागर ज्योतिष रॉय कॉलेज के पास रिक्शा स्टेण्ड पर अपनी रिक्शा में बैठा एक आदमी कोई पुस्तक पढ़ रहा था | इस पुस्तक में एक शब्द 'जिजीविषा' पर आकर वह रुक गया जिसका अर्थ बहुत प्रयास के बाद भी समझ में नहीं पा रहा था | उस शब्द के अर्थ के बारे में अपने साथी रिक्शा चालकों से उसने चर्चा किया पर उसके शंका का कोई समाधान तो कोई कर नहीं पाया उलटे उसे हंसी का पात्र बना डाला | उस शब्द के बारे में जानने की उत्कंठा उसे इस कालेज के पास ले आई | यहाँ उसे सवारी के साथ अपने शंका समाधान का श्रोत भी मिलने की संभावना थी |
            कालेज के मुख्य द्वार से एक अधेड़ उम्र की महिला को आता देख उस पुस्तक को सीट के नीचे सरका दिया | साधारण सी सूती साड़ी में कंधे पर एक थैला लटकाये पास आती वो महिला कुछ युवतियों से बाते करते हुए उसके रिक्शा की तरफ आयीं | उसने मन ही मन सोचा, “शायद ये कोई प्रोफ़ेसर हैं, इनसे मेरे प्रश्नों का जवाब मिल सकता है"!
            कालेज से बस स्टेण्ड की दूरी मात्र 2 किलोमीटर थी | उहापोह की स्थिति से गुजरता हुआ वह आगे बढ़ा जा रहा था | पूछूँ या न पूछूँ यही द्वन्द उसके मन में लगातार चल रहा था | यात्री का गन्तव्य आ गया | वह भी द्वन्द की स्थित से बाहर आते हुए बोल पड़ा, “क्या मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूँ ?” सवारी के हाँ कहते ही पूछ बैठा, “जिजीविषा का अर्थ क्या होता है?” उसके प्रश्न पर वो अवाक थीं, धीरे से उन्होंने बताया 'जीने की इच्छा'| शब्द का अर्थ जानकार उसे काफी राहत मिली | उसे यह भान नहीं था कि जिससे यह प्रश्न किया गया वे उस पुस्तक की लेखिका थीं |
            अपने बटुए से रिक्शा वाले को देने के लिए पैसा निकलते हुए उन्होंने उससे पूछा, 'तुम्हे यह शब्द कहाँ से मिला?'उसने रिक्शा के पिछली सीट के नीचे के बक्से से एक पुस्तक निकाला और कहा, 'मैं अग्निगर्भा नामक एक उपन्यास पढ़ रहा था | इसमें यह शब्द मिला जो मुझे काफी देर से बेचैन किये हुए था |'
            उस महिला ने उससे पूछा, 'क्या तुम मेरी पत्रिका के लिए कहानी लिखोगे |'
            यह प्रस्ताव उसके लिए काफी हैरानी भरा  था बड़ी हैरानी से उसने देखा और कहा, 'मैं अनपढ़ हूँ, कभी स्कूल नहीं गया | आजतक जितना भी पढ़ना सीखा हूँ वह अपने प्रयास से सीखा हूँ | आज भी शब्दों को जोड़- तोड़कर पढ़ता हूँ| ऐसे में लिखने का काम कैसे कर सकता हूँ ?'
            उसके नकारात्मक उत्तर से वो अविचलित रहीं | उन्होंने कहा कि मेरी यह पत्रिका तुम जैसे गरीब, आदिवासी  एवं समाज के समस्त पिछड़े लोगों से संबंधित कहानियों पर आधारित है | और तुम वखूबी इसमें लिख सकते हो |
            उसने कहा कि प्रयास करेगा | और उनसे पता माँगा | उसने कहा कि यदि लिख सका तो अवश्य ही आपसे मिलने आऊंगा | उन्होंने उसे अपना पता लिखकर दिया और यह कहते हुए अपनी बस की तरफ बढ़ चलीं कि मैं तुम्हारे रचना का इन्तजार करुँगी |
            उस कागज़ पर लिखे विवरण को देख रिक्शावाला हतप्रभ रह गया | वो महिला महाश्वेता देवी थीं जो अग्निगर्भा नामक उपन्यास की लेखिका थीं जिसे वह पद रहा था |

            इस मुलाक़ात ने उसके जीवन में परिवर्तन ला दिया | अबतक जो सिर्फ पढ़ना ही जानता था पर रचना के विषय में कभी सोच भी नहीं सकता था उसके साहित्यकार बनने का मार्ग महाश्वेता देवी ने प्रशस्त कर दिया | उन्होंने उसे लिखने के लिए प्रोत्साहित किया | ये श्री मनोरंजन व्यापारी हैं जो ऐसे पहले रचनाकार हैं जिन्हें पश्चिम बंगाल का सर्वश्रेष्ठ साहित्य पुरस्कार 'बंगाल अकादमी पुरस्कार' प्राप्त हुआ | अबतक उनके 100 लघुकथा एवं नौ उपन्यास प्रकाशित हो चुके  हैं | उनकी पहली रचना रिक्शावालों पर आधारित 'रिक्शा चालाई' थी जिसे पूरा करने में लगभग एक माह लग गया था |पंद्रह पन्ने की यह कहानी बड़ी ही खराब लिखावट और अशुद्धियों से भरी हुई थी | पर इसके प्रकाशन के बाद उनकी रचना की मांग आने लगी | यह रचना 'बत्रिका' नामक पार्टीका में प्रकाशित हुई थी | इस प्रकाशन के बाद वो 'जिजीविषा' नामक उपनाम से लिखना प्रारम्भ किया | कई बार महाश्वेता देवी से उनकी मुलाकात हुई पर पहली मुलाकात ने उनके जीवन में परिवर्तन ला दिया

IDENTIFICATION AND KNOWLEDGE OF SNAKE


FIRST AID TREATMENT OF SNAKE BITE AND WE MUST KNOWLEDGE ABOUT TREATMENT PROTOCOL OF SNAKE BITE CASES IN A HOSPITAL
By Soumya Sengupta (9474565047)
(Courtesy Dr.Dayal Bandhu Majumdar and  his Whats app group Snake Bite Interest Group)

Preface :- As per official records every year minimum of 50,000 people die due to snake bite but the unofficially this toll is more than 1,00,00. Whereas in Australia despite the largest number of poisonous snakes the death rate due to snake bite is  average 2-3 person per five year.
Did we ever wondered why such a difference?
The main reason behind these deaths are ignorance, seeking treatment from majic healers and quakes . Non availability of proper treatment in rural area also added to this problem.
It also a most unfortunate fact that the treatment protocol of snake bite in India is most neglected syllabus of MBBS curriculum in India . The neglected rural problems may be one of the reasons for this. In the prevailing situation a WhatsApp group named as 'Snake bite interest group” under the leadership of Dr. BN Majumdar has come up as a ray of hope for the victims of snake bite. It has Specialist Doctors of more than six States of India as members who are continuously enriching the knowledge by posting the case details of various snake bite cases and also offering their guidance on treatment of snake bite over telephone. The continued and combined effort of these learned Doctor's has lead  to the formation of “Snake bite treatment protocol” which has been included in the curriculum of medical education . A chapter on snake bite management has been included in the syllabus of class-VII of West Bengal. Sheer awareness can only be helpful in avoiding death due to snake bite.
 Let us discuss the poisonous and dangerous snakes and identify the  deadly killer. These are the four venomous snake species responsible for causing the most human snake bite cases leading to death.
1. Cobra(hooded snake has with neurotoxic poison)
2. Saw-scaled viper(hooded snake with neurotoxic poison)
3. Russel's Viper(Generally affect circulatory system)
4. Common Krait(Non hooded snake with neurotoxic poison)
Apart from these there is one more species of poisonous snake i.e. Branded Krait but Banded kraits are shy, not typically seen, and are mainly nocturnal. When harassed, they will usually hide their heads under their coils, and do not generally attempt to bite. Hence we need not worry about it.
 For prevention of snake bite :-
* Keep your surroundings clean.
* Before sleeping in night, the bed must be cleaned and mosquito net must be used.
* Try to avoid walking outside during night. In case it is unavoidable, try to use a stich and while walking keep striking the ground with it, clapping will be of no use  because the snake does not have ears.
* Flip your shoes before putting it on.
* Close the rat holes of houses.
Please note that any black magic will never ever save the life from snake bite.

First Aid treatment of snake bite

Follow the procedure of Do   R_I_G_H_T
R- Reassurance
Reassure the patient, because due to fear of death, a snake bite victim will always be in a state of severe stress. He/She must be convinced that with proper treatment and care lots of patient have ben saved and so will he.

I – Immobilization
The lower mobility will ensure less spread of poison in body. To avoid bending the affected part, tie a scale or a piece of stick using a cloth piece  over the affected part(Hand/Leg).

GH – Go To Hospital
Make a telephonic inquiry from nearest hospital that whether
1. A.V.S ,
2. Neospegmine
3. Atropine and
4) Adrenaline
 is available. Go to the hospital that stocks these medicines. Please remember that snake bite cases can eaisily be treated at Primary Health Center of a block. If possible, make the patient sit between two people on a motorcycle. To keep the patient awake engage him/her in a conversation. Please remember that time plays important role in life saving.

T- Tell Doctor for Treatment

On reaching the hospital, ask the doctor to treat for snake bite.  While narrating the history of case any notable changes in change in voice pattern and its time of origin should also be explained to the Doctor.

RULE OF 100

Infusion of 100ml of AVS in body within 100 minutes of snake bite increases 100% chances of survival of patients. Let us know the protocol of management of a snake bite patient once it reaches hospital and how does a doctor confirm that it is a case of snake bite.

২০ WBCT
(20 Minute Whole Blood Clotting Test)
It is a procedure to detect the effect of venom of a snake.
Tools :-
(a) Syringe
(b) Dried, clean and new test tube(plastic and reused clean test tube will not suffice. For accuracy both are quite essential)



Procedure:-
             Withdraw 2ml blood from patient and put it in a vertically placed glass test tube. Leave ti for 20 minutes(a stop watch will be a better option for measuring time). After 20 minutes slightly tilt the test tube for any coagulation(clotting). Non coagulation is the confirmation of a Russel Viper bite. Please note that No pathology is required for this test.

           Other than Russel Viper(Hematotoxic) all type snake bite can be diagnosed based on the  symptoms of a patient.
 
Symptoms of envenomous(poisoning):-
1) Bilateral Ptosis(Main symptom in all snake bite)
2) Severe burning sensation near fang mark(In case of hooded snake)
3) Subsequently localised sewlling .
4) Bleeding from various parts of body(in case of Russel viper bite)
5) Difficulty in swoolowing.
6) Blurred vision.
7) Tongue falling back.
8) Dizziness
If treatment delayed, breathing problem and later on death due to choaking.
*In case of Common Krait bite(deadliest snake of Aisan region) there is no localized burning sensation, there is no fang mark sensation. Pain abdomen, joint pain, fits or feeling of weakness and ptosis is a sure symptom of Krait bite.

Treatment-
Once en-venomous is confirmed, the Doctor

* No skin test is to be carried out(As it has been discontinued by the WHO guidelines in the year 2010). ¼ part of Injection Adrenaline subcutaneous (same dose for the patient ranging from child to elderly)(rest need to be kept to tackle Adverse Reaction). 10 vials of AVS to be put in saline and infused within less than one hour through intravenous route.Neostigmine and Atropine injection should also be given failing which the patient may die.(in case of 100% confirmed case of Russel viper bite, these two may not be necessary)
* In any case without administration of 10 vials of AVS, Neostigmine and Atropine, the patient should not be transferred(Please note that during 2014, Malati Lohar , a Krait bite victim of Vishnupur infused only 05 vials of AVS and was transferred from Vishnupur District hospital to Bankura without administering Neostigmine and Atropine injection died enroute.

*In few cases adverse reaction of AVS may occur which includes difficulty in breathing, severe bodyache ect. Suct reactions can be managed with 0.5ml Adrenaline injection.

* In case of severe envenomous, second or third dose of AVS can be administered in hospital having facilities of treatment of Kidney ailments.
In case Russels Viper bite dialiasis may be eminent.(A delay of each minute leads to damage of kidney one percent.) Delay is treatment of hooded snake bites may lead to necrosis, later on it may lead to amputation opf the affected part of the body.



Let us join hand in preventing deaths due to snake bite and persuade the referral of victims to nearby Hospital and providing free of cost treatment.
 Please do remember that Govt. of West Bengal has a provision of offering an ex gratia of  Rs. 1 Lakhs to the next of kins of the person who die due to snake bite. For this a certificate from the Govt. hospital is required mentionng the cause of death as snake bite. And for claiming the amount the post mortem report is not at all required(Govt. Of WB order No-1561(19)F.R/4P-3/04 dated 19.08.2008.



हिंदी मे काम की कुछ वेबसाईट

कंम्यूटर अभियांत्रिकी (हिंदी में)-https://youtu.be/Ono2mfQTiBA
[05/04, 8:31 PM] Rahul Khate. Hindi: CLASS 11 BIOLOGY PRAGYA LECTURE KANKER CHHATTISGARH: http://www.youtube.com/playlist?list=PLZ4yeuWi-T_MIBrF-GKgIv4x1pmo-Frqg
[05/04, 8:34 PM] Rahul Khate. Hindi: प्रकाश संश्लेषण: https://youtu.be/_Csly0hrr7I https://youtu.be/_Csly0hrr7I

गली-कूचा : अनुवाद में सही शब्द का चयन महत्वपूर्ण क्यों??

कार्यालयीन हिंदी : स्वरूप एवं प्रयोग

 दिनांक 26 जनवरी 1950 ई० को भारत एक गणतन्त्र देश बना । किसी भी स्वतंत्र देश की आधिकारी राष्ट्रभाषा उसके मान और गौरव को बढ़ाती है । भारत के संविधान के भाग 17 के अनुच्छेद 120,210 एवं 343 से 351 तक संघ की भाषा एवं इसके विभिन्न प्रावधानों के बारे में चर्चा की गयी है ।इन उपबंधों के आधार पर संघ की राजभाषा के रूप में हिन्दी के प्रयोग को मान्यता दी गयी है । गृह मंत्रालय की दि. 27 अप्रैल, 1960 ई० की अधिसूचना संख्या 2/8/60-रा.भा., की अधिसूचना के आधार पर राष्ट्रपति का आदेश आम जानकारी के लिए प्रकाशित किया गया जिसमें लोकसभा के 20 सदस्यों और राज्य सभा के 10 सदस्यों की एक समिति प्रथम-राजभाषा आयोग की सिफारिशों पर विचार करने लिए और उनके विषय में अपनी राय राष्ट्रपति के समक्ष पेश करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 344 के खंड (4) के उपबंधों के अनुसार नियुक्त की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति के समक्ष 8 फरवरी, 1959 को पेश कर दी। इन रिपोर्टों के आधार पर देश की राजभाषा के रूप में हिन्दी को प्रतिष्ठित किया गया । तदनुसार 1963  ई० में राजभाषा अधिनियम बना जिसे बाद में संशोधित रूप में पुनः 1967 ई० में प्रकाशित किया गया । राजभाषा संकल्प 1968 ई० एवं राजभाषा नियम 1976 ई० का निर्माण हुआ । इन नियमों एवं अधिनियम के निर्माण का मुख्य उद्देश्य देश की राजभाषा के रूप में हिन्दी को मान्यता एवं इसके क्रियान्वयन के लिए विभिन्न उपबंधों एवं उपायों का समावेश करना था । कतिपय कारणों से हिन्दी को राष्ट्र भाषा के रूप में अबतक मान्यता नहीं मिल सकी है पर राजभाषा के रूप में समस्त सरकारी कामकाज में विशेषकर केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में इसके प्रयोग पर बल दिया जाता है तथा यह अपेक्षा की जाती है कि इसके प्रयोग,प्रचार एवं प्रसार के लिए समस्त कर्मचारी प्रयास करेंगे।

भाषाई आधार पर राज्यों का विभाजन : कार्यान्वयन में सुविधा की दृष्टि से भाषाई आधार पर भारत को क्रमशः ’, एवं तीन भागों में विभाजित किया गया है । क्षेत्र के राज्यों में बिहार, छत्तीसगढ, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और केंद्र शासित क्षेत्र दिल्ली तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह आते हैं । क्षेत्र में गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब राज्य तथा चंडीगढ़, दमण और दीव तथा दादरा और नगर हवेली संघ राज्य क्षेत्र हैं तथा उपरोक्त तथा क्षेत्र के अतिरिक्त अन्य सभी राज्य क्षेत्र में आते हैं । सरकारी कार्यों के लिए पत्राचार हेतु इन राज्यों में विभिन्न लक्ष्य निर्धारित किये गए हैं । इन लक्ष्यों के आधार पर यह अपेक्षित है कि एवं क्षेत्र के राज्यों के केंद्रीय सरकार के कार्यालय आपस में जो भी पत्राचार करें वह शत प्रतिशत हिन्दी में किया जाए तथा क्षेत्र के कार्यालयों के लिए यह लक्ष्य  60 प्रतिशत पत्राचार का है । क्षेत्र के कार्यालयों से क्षेत्र के कार्यालयों को भेजे जाने वाले पत्र हिन्दी में हो सकता है पर यह अपेक्षा की जाती है कि उनका अंग्रेजी अनुवाद भी साथ में भेजा जाए ।

सरकारी कार्यालयों में पत्राचार का स्वरूप :  केंद्रीय सरकार के सरकारी कार्यालयों में विभिन्न स्तरों पर पत्राचार हेतु विभिन्न स्वरूप प्रचलन में हैं । किसी कार्यालय में कार्यालय के कार्मिकों को कोई जानकारी देने के उद्देश्य से जारी किए जाने वाले पत्र को परिपत्र(circular) कहा जाता है । किसी एक शाखा से दूसरी शाखा से पत्राचार के लिए प्रयुक्त स्वरूप को अनौपचारिक टिप्पणी कहा जाता है । एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में भेजा जाने वाला पत्र कार्यालयीन पत्र कहा जाता है । इसके अतिरिक्त किसी कर्मचारी को यदि कोई विशेष प्रकार का अनुदेश दिया जाना हो तो उसे ज्ञापन के रूप में निकाला जाता है जो व्यक्ति विशेष को संबोधित होता है । इन समस्त पत्रों का स्वरूप एक दूसरे से भिन्न होता हैं  । भारत सरकार के राजभाषा अधिनियम 1963 के धारा 3(3) के अनुसार पत्राचार के कुल 14 ऐसे स्वरूप हैं जिन्हें आवश्यक रूप से द्विभाषी रूप में जारी किया जाना अपेक्षित है । वे कागजात हैं -1.सामान्‍य आदेश  2.संकल्‍प 3.नियम 4.प्रेस विज्ञप्ति 5.अधिसूचना 6. प्रशासनिक एवं अन्‍य रिपोर्ट 7. सूचना 8. निविदा प्रारूप 9. संविदा 10. करार 11.अनुज्ञप्ति 12.अनुज्ञापत्र 13.संसद में प्रस्‍तुति हेतु प्रशासनिक एवं अन्‍य रिपोर्ट एवं 14.संसद में प्रस्‍तुति हेतु शासकीय कागजात। ऐसे कागजात को मात्र अंग्रेजी में जारी करना राजभाषा अधिनियम के उपबंधों का उल्लंघन माना जाता है । किसी भी कार्यालय में राजभाषा अधिनियम के उपबंधों के अनुपालन की ज़िम्मेदारी कार्यालय प्रमुख की होती है । कतिपय मामलों में राजभाषा अधिनियम के उपबंधों का अनुपालन हर हाल में सुनिश्चित करना अपेक्षित है । इसके अतिरिक्त यह भी अपेक्षित है कि हिन्दी में प्राप्त पत्रों का उत्तर हिन्दी में ही दिया जाए ।

राजभाषा अधिनियम के उपबंधों का कार्यान्वयन एवं उसका प्रचार प्रसार : राजभाषा अधिनियम के लागू होने तक या इसके कार्यान्वयन के लिए बनाए गए उपबंधों में यह भी उल्लेख है कि हिन्दी के साथ साथ सह भाषा के रूप में अगले 15 वर्षों तक अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहेगा । इस प्रावधान के कारण अधिकांशतः सरकारी कार्यालयों में हिन्दी का कम प्रयोग हुआ तथा अंग्रेजी का प्रचलन बदस्तूर जारी रहा। सरकारी कार्यालयों में नौकरी पर नियुक्त होने वाले कार्मिकों को काम करने के लिए अलग से कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है । उन्हें मात्र परिवीक्षा पर कुछ समय के लिए रखा जाता है । अब जब काम करने की आवश्यकता पड़ी तो अधिकांश कर्मचारी फाइलों में पड़े पूर्व के संदर्भों को देखते हुए उसी के समरूप पत्राचार का प्रयास करते गए । चूंकि प्रत्येक सरकारी विभाग के फाइलों में अधिकांश पत्राचार अंग्रेजी में होने के कारण कार्मिक अंग्रेजी के पत्राचार को ही पराश्रय देते चले गए । सरकारी कार्यालयों में हिन्दी के कार्यान्वयन में यह काफी बाधक है । हिन्दी का ज्ञान रखने वाले कार्मिकों को दो वर्गों में विभाजित किया गया है । मैट्रिक या उसकी समतुल्‍य या उससे उच्‍चतर परीक्षा हिंदी के साथ उत्‍तीर्ण कार्मिक को हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कार्मिक माना जाता है । विभिन्न स्तरों पर हिन्दी का प्रशिक्षण देने के लिए भारत सरकार द्वारा कार्मिकों को हिन्दी का प्रशिक्षण दिया जाता है । हालांकि हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए भारत सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा समय-समय पर विभिन्न उपाय किया जाता है जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण का आयोजन तथा उन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को पास करने पर वेतन वृद्धि एवं एक मुश्त नकद पुरस्कार का प्रावधान,हिन्दी में कार्य करने पर कैलेंडर वर्ष एवं वित्त वर्ष की समाप्ति पर नकद पुरस्कार का प्रावधान किया गया है । इन प्रयासों के अतिरिक्त सरकारी कार्यालयों में राजभाषा अनुभाग द्वारा त्रैमासिक प्रशिक्षण का आयोजन तथा हिन्दी कार्यान्वयन की प्रगति की देख-रेख के लिए कार्यालय प्रमुख की अध्यक्षता में तिमाही बैठक का आयोजन किया जाता है ।

कार्यालयीन हिन्दी का स्वरूप : भाषा का मुख्य उद्देश्य है अपनी बात सामने वाले से या जिसके लिए प्रयुक्त हो उसे आसानी से समझाई जा सके वह आसानी से ग्राह्य हो । समस्त उपबंधों के होते हुए भी आम लोगों में यह धारणा है कि हिन्दी का प्रयोग कठिन होगा क्योंकि साहित्यिक हिन्दी अपेक्षाकृत कठिन होता है और यदि इस हिन्दी का प्रयोग आम पत्राचार में किया जाए तो हास्यास्पद या समझने में कठिनाई आएगी । शायद इसी भ्रम के आकरण लोग हिन्दी को अपनाने से कतराते हैं । इस समस्या के निजात के लिए भारत सरकार, राजभाषा विभाग द्वारा आसान हिन्दी के प्रयोग पर बल दिया जाता है । आसान हिन्दी का अर्थ है स्थानीय एवं आम बोलचाल कि भाषा का प्रयोग सरकारी कार्यों के लिए किया जाए । इस प्रकार से हिन्दी का प्रचलन बढ़ेगा । चूंकि हमारा देश  विभिन्न भाषा-भाषी समुदायों से युक्त है अतः आसान हिन्दी समझ पाना सबके लिए आसान होगा तथा क्षेत्र विशेष के प्रचलित शब्दों के प्रयोग से भाषा की धारा भी सुचारु रूप से चलती रहेगी तथा इससे हिन्दी का प्रयोग भी बढ़ेगा । आम तौर पर देखा गया है कि आसान शब्दों को ग्रहण करने में जितनी आसानी होगी उतनी ही कठिनाई एवं भारी भरकम शब्दों के साथ आएगी । जिन सरकारी कार्यालयों में इस विधि का अनुसरण किया गया वहाँ हिन्दी का प्रचार प्रसार अपेक्षाकृत अधिक ही हुआ । उदाहरणस्वरूप अंग्रेजी का शब्द approval के लिए हिन्दी के कई विकल्पों का प्रयोग किए जा सकते हैं जो अनुमोदन, संस्तुति आदि हो सकता है । यह भी प्रावधान किया गया कि यदि कोई कार्मिक हिन्दी लिखने में वर्तनी संबन्धित यदि कोई त्रुटि भी करता है तो उसे इस बात के लिए हतोत्साहित करने की बजाय प्रोत्साहित किया जाए कि उसने हिन्दी में लिखने का प्रयास तो प्रारम्भ किया ।
     
      कई बार ऐसा देखा गया ही कि अंग्रेजी में प्राप्त पत्रों को हिन्दी में अनूदित करवाने की आवश्यकता पड़ जाती है । अनुवाद करते समय अधिकांशतः लोग शब्दानुवाद का प्रयास करते हैं । शब्दानुवाद कुछ हद तक तो ठीक है पर जब हम यह अनुवाद आसानी से भाषा के कथ्य को समझने के लिए करते हैं तो कहीं कहीं शब्दानुवाद के कारण उस विषय का मूल अर्थ भारी और उबाऊ होने के साथ समझ से परे हो जाता है । ऐसे में यह सलाह दी जाती है कि भावानुवाद किया जाए तथा दिये गए अंग्रेजी पाठ के मूल कथ्य को प्रदर्शित किया जाए ताकि उसे समझने में आसानी हो तथा उसके अनुरूप पत्राचार किया जा सके । सरकारी कामकाज में पहले देखा गया है कि अंग्रेजी के कुछ ऐसे वाक्य होते हैं जिनका हिन्दी अनुवाद बड़ा ही कठिन लगता है या हिन्दी में उन शब्दों या वाक्यों का प्रयोग करना बड़ा ही अटपटा लगता है जैसे I am directed to say /I am directed to forward… ऐसा माना जाता है कि पत्र जारी करने वाला अधिकारी अपने से कुछ नहीं कर रहा है । वह सरकार के अनुदेश पर समस्त कार्य करता है इसी लिए हमेशा पत्राचार में यह वाक्य प्रयोग किया जाता है । इनका हिन्दी में अनुवाद मुझे यह कहने का निदेश हुआ है/मुझे.... अग्रेषित करने का निदेश हुआ है । अंग्रेजी के पत्र में सम्बोधन के लिए Dear Sir का प्रयोग होता है पर हिन्दी में महोदय लिखा जाता है । अंग्रेजी पत्राचार में Yours faithfully, लिखा जाता है पर इसके हिन्दी रूपमें आपका विश्वासी लिखना कतई उपयुक्त नहीं होगा । इसके स्थान पर हम भवदीय लिखते हैं ।

      कार्यालयों में आम पत्राचार के अतिरिक्त एक और चीज प्रचलन में है जिसे नोटिंग कहा जाता है। सरकारी कार्यालयों में कोई भी कार्य बिना फाइल पर टिप्पणी के नहीं की जा सकती । कार्य करने वाला सहायक कोई भी बात या अपने उच्चाधिकारी को फाइल पर नोट के रूप में लिखकर करता है । इसे अंग्रेजी में नोटिंग(Noting) कहा जाता है । उसकी बात पर उच्चाधिकारी द्वारा तदनुसार  कार्य करने का अनुदेश दिया जाता है । कार्यालय के पत्राचार का यह प्रथम सोपान होता है । अंग्रेजी में लिखे जाने वाले नोट अमूमन passive voice, third person के रूप में लिखे जाते हैं पर हिन्दी में सीधे सपाट शब्दों  में तथा आसान वाक्यों में लिखने पर बल दिया जाता है । उदाहरण के लिए नोट शीट में किसी बात को प्रस्तुत करने के लिए अंग्रेजी में Submitted please लिखकर शुरुवात की जात है हेसे मान लीजिये कार्यालय में दो कार्मिकों की कमी है । इस कमी को दूर करने के लिए मुख्यालय से दो कार्मिकों की मांग की जानी है । इसके लिए कार्य करने वाला सहायक फाइल में कुछ इस प्रकार से नोट प्रस्तुत करेगा :-
Submitted please
                  There is an acute shortage of staff in this office. To fill the deficiency HQ office may be requested to transfer two staff.

                  Submitted for your approval please.
इसे हिन्दी में प्रस्तुत करने के लिए निम्नलिखित रूप से लिखा जा सकता है :-

प्रस्तुत/प्रस्तुति
            हमारे कार्यालय में कार्मिकों की भारी कमी है । इस कमी को दूर करने के लिए मुख्या से दो कार्मिकों की तैनाती के लिए निवेदन किया जा सकता है ।

            अनुमोदनार्थ/अनुमोदन हेतु प्रस्तुत ।

      अंग्रेजी के वाक्यांश में यदि हम देखें तो please शब्द का खूब प्रयोग होता है । पर यह माना जाता है कि प्रशासनिक कार्यों में भावना का स्थान नहीं होता है अतः ऐसे शब्दों का पत्राचाट  में प्रयोग न किया जाए । सीधे एवं सपाट शब्दों में अपनी बात कही जाए। तदनुसात उच्च अधिकारी द्वारा भी तदनुसार अपनी टिप्पणी दी जाती है ।

नोटिंग के बाद ड्राफ्टिंग का क्रम आता है । ड्राफ्टिंग का अर्थ है किसी भी पत्र या विवरण का मसौदा तैयार करना । कोई भी पत्र या पत्राचार के लिए विवरण पहले उच्चाधिकारी द्वारा अनुमोदन करवाना आवश्यक होता है । इसके लिए सहायक द्वारा लिखा जाने वाला समस्त विवरण पत्र/ज्ञापन/परिपत्र के रूप में मसौदा उच्चाधिकारी के पास प्रस्तुत किया जाता है । उच्चाधिकारी द्वारा उक्त विवरण का अवलोकन करने के बाद उसमें या तो संशोधन का सुझाव दिया जाता है या  फिर उसका अनुमोदन कर दिया जाता है । तदनुसार पत्र के अंतिम स्वरूप को अधिकारी द्वारा हस्तक्षार करने के बाद कार्मिक द्वारा जारी कर दिया जाता है ।


      कार्यालयीन हिन्दी एवं अंग्रेजी में यदि हम अंतर देखें का प्रयास करें तो सदा यह सलाह दी जाती है कि आसान हिन्दी का प्रयोग करें । इसके लिए आपके मन में जो विचार आता है, या जो कहा जाना है उसे साफ एवं स्पष्ट शब्दों में प्रस्तुत करें । राजभाषा अधिनिय के उपबंधों के अनुसार हिन्दी में प्रस्तुत किए गए मसौदे या नोट के लिए कोई भी अधिकारी उसके अंग्रेजी अनुवाद की मांग नहीं कर सकता है । चूंकि बहुत कम लोग ही सीधे अंग्रेजी में सोचकर अपनी बात अंग्रेजी में ही लिख पाने में समर्थ होते हैं, अधिकांशतः आम भारतीय कोई भी बात अंग्रेजी में लिखने से पूर्व अपने मातृभाषा में सोचता है फिर उन शब्दों या वाक्यों को मन ही मन अंग्रेजी में अनूदित करने का प्रयास करता है । अब अनुवाद की प्रक्रिया में हमेशा व्याकरणिक शुद्धियों का ध्यान रखना पड़ता है । यदि थोड़ी सी अशुद्धि हो जाए तो अर्थ का अनर्थ हो जाने का अंदेशा रहता है । अंग्रेजी लिखने के इस प्रयास में अत्यधिक मानसिक श्रम करना पड़ता है । इसके इतर यदि हम हिन्दी में लिखने का प्रयास करते हैं तो हमें अधिक श्रम करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है । हिन्दी में लिखने का सबसे बड़ा फाइदा यही है कि वाक्य संरचना में शब्दों की क्रम यदि आगे पीछे भी हो जाए तो वाक्य का अर्थ नहीं बदलता है । और फिर अपनी भाषा में अपनी बात कहना अधिक आसान होता है । हिन्दीतर भाषाई क्षेत्र के लोगों के लिए भी अपने मातृभाषा से अंग्रेजी की बजाय हिन्दी में कोई बात अनूदित कर कहना अत्यधिक आसान होता है । ऐसे में हिन्दी में सरकारी काम अत्यधिक आसान होता है । बस मन का डर दूर कर प्रयास करने की आवश्यकता है ।