कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित किये जाने वाले कनिष्ठ अनुवादक परीक्षा 2020 के हिंदी के संभावित प्रश्नों को लेकर एक मॉक टेस्ट बनाया गया है।परीक्षा के पूर्व कृपया अपनी तैयारी का स्तर जानने के लिये एक बार अवश्य देखें। इस लिंक पर क्लिक करें :-
सोमवार, 16 नवंबर 2020
कर्मचारी चयन आयोग के अनुवादक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को बधाई
दिनांक 13 नवम्बर 2020 को कर्मचारी चयन आयोग द्वारा सन 2019 के अनुवादक परीक्षा का अंतिम परिणाम और वरीयता सूची प्रकाशित हुई। भाषाशिक्षण परिवार के लिये यह गर्व का विषय है कि इसके यूट्यूब वीडियो और अनुदेशों का अनुसरण कर 100 से भी अधिक प्रत्याशी सफलतम घोषित हुए।इन सफल अभ्यर्थियों में कल्याणी(अखिल भारत मे तृतीय स्थान),कुमारी निशा(11वां स्थान) प्राप्त किया। रिपोर्ट लिखे जाने तक जिन अभ्यर्थियों द्वारा जानकारी उपलब्ध करवाई गई उनका विवरण निम्नवत है:-
*सौरभ** रवि वर्मा** संदीप मिस्त्री*
*आकृति** रूपा* * बाबूलाल मीना*
*अवनीश द्विवेदी* *विजय* *अंजलि रोहिला*
*संगीता**रूपेश**अल्पना*
*अनुराग शर्मा**लिपि**रिशान्क कौशिक*
*शिल्पा**ललित बाजपेयी**पंकज*
*सीमा**निशा**नंदनी**नेहा*
*राकेश पपने**अभिषेक**रोहित शर्मा*
भाषाशिक्षण परिवार की तरफ से समस्त सफल विद्यार्थियों को ढेरों बधाई और इनके सुनहरे भविष्य की कामना है।
कुछ सफल अभ्यर्थियों द्वारा की गई प्रशंसा से अभिभूत हूँ।इनमे से कुछ टिप्पणियों के विवरण संलग्न है:-
शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020
*💥कर्म और निंदा💥*
(यह रचना मेरी नहीं है।व्हाट्सएप से संकलित है)
*एक राजा एक दिन सुबह-सुबह घोड़ों के तबेले में जा पहुँचे। तभी वहाँ एक साधु भिक्षा मांगने आ पहँचा। सुबह-सुबह साधु को भिक्षा मांगते देख राजा क्रोध से भर उठे। उन्होंने साधु की निंदा करते हुये, बिना विचारे तबेले से घोड़े की लीद उठाई और उसके पात्र में डाल दी। साधु भी शांत स्वभाव का था, सो भिक्षा ले वहाँ से चला गया और वह लीद कुटिया के बाहर एक कोने में डाल दी।*
*कुछ समय उपरान्त राजा शिकार के लिये गये। राजा ने जंगल में देखा कि, एक कुटिया के बाहर घोड़े की लीद का बड़ा सा ढेर लगा हुआ है। उन्होंने देखा कि, यहाँ तो न कोई तबेला है और न ही दूर-दूर तक कोई घोड़े दिखाई दे रहे हैं। वह आश्चर्यचकित हो कुटिया में गये और साधु से बोले, "महाराज ! आप हमें एक बात बताइये, यहाँ कोई घोड़ा भी नहीं, न ही तबेला है, तो यह इतनी सारी घोड़े की लीद कहा से आई ?"*
*साधु ने कहा, " राजन् ! यह लीद मुझे एक राजा ने भिक्षा में दी है। अब समय आने पर यह लीद उसी को खानी पड़ेगी।"*
*यह सुन राजा को पूरी घटना याद आ गई। वे साधु के पैरों में गिर क्षमा मांगने लगे। उन्होंने साधु से प्रश्न किया, हमने तो थोड़ी-सी लीद दी थी, पर यह तो बहुत अधिक हो गई ?*
*साधु ने कहा, हम किसी को जो भी देते हैं, वह दिन-प्रतिदिन प्रफुल्लित होता जाता है और समय आने पर हमारे पास लौटकर आ जाता है, यह उसी का परिणाम है।*
*यह सुनकर राजा की आँखों में अश्रु भर आये। वे साधु से विनती कर बोले, "महाराज ! मुझे क्षमा कर दीजिये। मैं आइन्दा ऐसी गलती कभी नहीं करूँगा। कृपया कोई ऐसा उपाय बता दीजिये, जिससे मैं अपने दुष्ट कर्मों का प्रायश्चित कर सकूँ।" राजा की ऐसी दु:खमयी हालत देखकर साधु बोला, "राजन् ! एक उपाय है। आपको कोई ऐसा कार्य करना है, जो देखने में तो गलत हो, पर वास्तव में गलत न हो।जब लोग आपको गलत देखेंगे, तो आपकी निंदा करेंगे। जितने ज्यादा लोग आपकी निंदा करेंगे, आपका पाप उतना हल्का होता जायेगा। आपका अपराध निंदा करने वालों के हिस्से में आ जायेगा।*
*यह सुनकर राजा ने महल में आकर काफी सोच-विचार किया और अगले दिन सुबह से शराब की बोतल लेकर चौराहे पर बैठ गये। सुबह-सुबह राजा को इस हाल में देखकर सब लोग आपस में राजा की निंदा करने लगे कि, कैसा राजा है ? कितना निंदनीय कृत्य कर रहा है, क्या यह शोभनीय है ? आदि-आदि ! निंदा की परवाह किये बिना राजा पूरे दिन शराबियों की तरह अभिनय करते रहे। इस पूरे कृत्य के पश्चात जब राजा पुनः साधु के पास पहुँचे, तो लीद के ढेर के स्थान पर एक मुट्ठी लीद देख आश्चर्य से बोले,"महाराज ! यह कैसे हुआ ? इतना बड़ा ढेर कहाँ गायब हो गया ?"
*साधू ने कहा, "यह आपकी अनुचित निंदा के कारण हुआ है राजन् ! जिन-जिन लोगों ने आपकी अनुचित निंदा की है,, आपका पाप उन सबमें बराबर-बराबर बंट गया है।*
*फिर राजा बोले, " महाराज, फिर ये मुट्ठी भर बचा क्यूँ?? ये क्यूँ नहीं बंटा??"*
*तो फिर ऋषि बोले, "राजन, ये तुम्हारा कर्म है। जितना तुमने मेरे भिक्षा पात्र मे मेरे खाने के लिए दिए थे उतना तो तुम्हें खाना ही पड़ेगा। "*
*कोई कितना भी उपाय, दान, पुण्य करले उसका कर्म दोष कट तो जाएगा पर उसका मूल नष्ट नहीं होगा... उतना तो भरना ही पड़ेगा.. जब हम किसी की बेवजह निंदा करते हैं, तो हमें उसके पाप का बोझ भी उठाना पड़ता है। तथा हमें अपने किये गये कर्मों का फल तो भुगतना ही पड़ता है। अब चाहे हँसकर भुगतें या रोकर। हम जैसा देंगे, वैसा ही लौटकर वापिस आयेगा।*
शनिवार, 3 अक्टूबर 2020
अनुवाद अभ्यास : मॉक टेस्ट
अनुवाद अभ्यास का यह मॉक टेस्ट quiz maker app में खुलेगा।इसे हल करने के लिये गूगल प्ले स्टोर से यह एप्प डाउनलोड कर लें।मुफ्त एप्प है।
अभ्यास के लिये प्रश्नावली इस लिंक से लें
https://drive.google.com/file/d/1SWz41TKE4Y2FOS_Osko-J3xFo5s6DQ72/view?usp=drivesdk
गुरुवार, 24 सितंबर 2020
सोमवार, 21 सितंबर 2020
राजस्थान उच्च न्यायालय अनुवादक चयन परीक्षा प्रश्नपत्र
राजस्थान उच्च न्यायालय के अनुवादक चयन परीक्षा के प्रश्नपत्र का लिंक
भाग-1
https://drive.google.com/file/d/1HKVV0xII6IlVCkn-9Ag33_-Ex80zOAas/view?usp=drivesdk
भाग 2
https://drive.google.com/file/d/1HKP1KqI-jbgT3Ea2hSMRKAc8WcZw-sMp/view?usp=drivesdk
बुधवार, 16 सितंबर 2020
SSC NORTHERN REGION TRANSLATORS EXAM DV ADMIT CARD LINK
https://www.sscnr.net.in/newlook/CallLetter_JHT_2019/Instructions.aspx
कागजात सत्यापन के लिये एसएससी उत्तरी क्षेत्र के अभ्यर्थी ऊपर के लिंक से अपने प्रवेशपत्र निकाल लें।
SSC NR ADMIT CARD कृपया इस लिंक से DOWNLOAD करें।
शनिवार, 5 सितंबर 2020
An accidental Teacher एक साक्षात्कार
शिल्पांचल के शेर नाम से मैंने अपने यूट्यूब चैनल पर साक्षात्कार की एक सीरीज की थी। उसी कड़ी में एक्सीडेंटल टीचर नाम से एक कड़ी में श्री दीपक कुमार जी का साक्षात्कार लिया था।दीपक जी ने अपने कौशल से तमाम बच्चों को पढ़ाई के अलावा जीवन कौशल में सिद्धहस्त किया है और उनका यह प्रयास आज भी जारी है।आज शिक्षक दिवस पर पुनः प्रस्तुत।🙏🏻
शुक्रवार, 4 सितंबर 2020
LEGAL TRANSLATION
Please translate this passage into Hindi
Ministry of Law and Justice is the oldest limb of the Government of India dating back to1833 when the Charter Act 1833 was enacted by the British Parliament. The said Act vested legislative power in a single authority for the first time, namely the Governor General of Council, by virtue of this authority and the authority vested under him under section 22 of the Indian Councils Act 1861 to 1920. After the commencement of the Government of India Act 1919 the legislative power was exercised by the Indian Legislature constituted thereunder. The Government of India Act 1919 was followed by the Government of India Act 1935. With the passing of the Indian Independence Act 1947, India became a Dominion and the Dominion Legislature made laws from
1947 to 1949 under the provisions of section 100 of the Government of India Act 1935 as adapted by the India (Provisional Constitution) Order 1947. Under the Constitution of India which came into force on the 26th January 1950 the legislative power is vested in Parliament.
अनुवाद
कानून और न्याय मंत्रालय भारत सरकार के सबसे पुराने अंग हैं, जब ब्रिटिश संसद ने चार्टर अधिनियम 1833 अधिनियमित किया था।इस अधिनियम के अंतर्गत पहली बार, अर्थात् परिषद के गवर्नर जनरल ने, इस प्राधिकार के कारण और भारतीय परिषद् अधिनियम 1861 से 1920 के बीच उसके अधीन विहित प्राधिकार के द्वारा, एक ही प्राधिकारी में विधायी शक्ति का उपबंध किया.भारत सरकार अधिनियम 1919 के प्रारंभ होने के बाद, उसके अधीन गठित भारतीय विधानमंडल ने विधायी शक्ति का प्रयोग किया.भारत सरकार अधिनियम 1919 के बाद भारत सरकार अधिनियम 1935 लागू हुआ।भारत के स्वाधीनता अधिनियम, 1947 के पारित होने के बाद भारत डोमिनियन बन गया और डोमिनियन विधानमंडल ने उसके द्वारा विधियां बनाई।
भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 100 के प्रावधानों के तहत 1947 से 1949 तक भारत (अनंतिम संविधान) आदेश 1947 के अनुसार अनुकूलित।भारत के संविधान के अधीन जो 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ, संसद में विधायी शक्ति निहित है।






